जम्मू-कश्मीर फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी में अपराध स्थल प्रबंधन पर 2-दिन की कार्यशाला शुरू
जम्मू, 24 फरवरी 2025: जम्मू-कश्मीर फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) में आज से दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य अपराध स्थल प्रबंधन के लिए उन्नत फॉरेंसिक प्रथाओं की जानकारी साझा करना और इस क्षेत्र में कार्यरत अधिकारियों के कौशल में वृद्धि करना है। जम्मू और कश्मीर राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से फॉरेंसिक विशेषज्ञ और पुलिस अधिकारी इस कार्यशाला में शामिल हुए हैं।
कार्यशाला में भाग लेने वाले अधिकारियों का उत्साह
इस कार्यशाला में जम्मू-कश्मीर के सभी जिला मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट्स के अधिकारी और फॉरेंसिक विज्ञान से संबंधित अन्य विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। कार्यशाला का उद्देश्य इन अधिकारियों को अपराध स्थल की प्रारंभिक जांच में उन्नत तकनीकी ज्ञान और कौशल प्रदान करना है, ताकि वे प्रभावी तरीके से जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकें।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों के विचार
कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर FSL के निदेशक गुरमुख सिंह ने फॉरेंसिक विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से अपराध स्थल पर अपराध के साक्ष्य को सुरक्षित रखने के तरीकों और अपराधी की पहचान में फॉरेंसिक तकनीकी उपकरणों के उपयोग के बारे में बताया। इसके साथ ही, उन्होंने बताया कि किस प्रकार फॉरेंसिक साक्ष्य अपराधी को पकड़ने में मदद कर सकते हैं और इससे कानून व्यवस्था में सुधार हो सकता है।
जिले के फॉरेंसिक यूनिट्स के लिए विशेष पहल
FSL श्रीनगर के उपनिदेशक और अधिकारी-इन-चार्ज, सैयद इशफाक मंजूर ने कार्यशाला के दौरान अपराध स्थल पर काम करने के लिए तैयार की गई नई सुविधाओं और उपकरणों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अब जम्मू-कश्मीर में जिला मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट्स को उन्नत उपकरण और तकनीकी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जिनसे हर जिले में अपराध स्थल का त्वरित विश्लेषण किया जा सकता है।
नए आपराधिक कानूनों की प्रभावशीलता
कार्यशाला में विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के नए आपराधिक कानूनों पर भी चर्चा की गई। सैयद इशफाक मंजूर ने 2023 के BNSS के धारा 176(3) का हवाला दिया, जिसके अनुसार सात साल से अधिक की सजा वाले सभी अपराधों में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। यह कानून अपराध जांच में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है।
समाप्ति सत्र और भविष्य की दिशा
कार्यशाला के समापन सत्र में, वैज्ञानिक अधिकारी शेख सुहैल ने अगले चरण की योजनाओं और भविष्य में होने वाली प्रशिक्षण कार्यशालाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के फॉरेंसिक विज्ञान विभाग में निरंतर सुधार किए जा रहे हैं, ताकि अपराध जांच प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हो सके।
निष्कर्ष
इस कार्यशाला के माध्यम से जम्मू-कश्मीर में अपराध स्थल प्रबंधन के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुली हैं। इस प्रकार के प्रशिक्षण से पुलिस अधिकारियों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को बेहतर निर्णय लेने और अपराधों की सही जांच करने में मदद मिलेगी, जो राज्य में न्याय व्यवस्था को और मजबूत करेगा।